
गुरुवार, 7 मई 2009
शनिवार, 11 अप्रैल 2009
मकान की समस्या और गन्दा नाला
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पीने को न होगा पानी

बहुत दिन से थे परेशान
ढूंढ रहे थे एक मकान
प्रोपर्टी डीलर ने किया एहसान
दिखाया एक मकान
मकान था बेहद आलीशान
यों लगा जैसे मिल गया समाधान
समस्या हो गयी आसान
पर तभी दिखा एक गड़बड़झाला
मकान से सट कर बह रहा था गन्दा नाला
नाला देख कर छोटा भाई बिदक गया
हमारा भी मन कुछ - कुछ हिचक गया
हमने आँखें मूँद कर अपने विचार्रों को कूटा
और तभी अन्दर से एक आईडिया फूटा
मैंने कहा अब ज़्यादा न सोचो भाईजान
मकान में घुस जाओ लेकर अपना सामान
कुछ समय बाद गहराएगा जल संकट
हल हो जाएगा अपना झंझट
नाला अपने आप ख़तम हो जाएगा
अरे! जब पीने को ही पानी न होगा
तो नाले में कौन बहाएगा
गुरुवार, 2 अप्रैल 2009
बुधवार, 18 मार्च 2009
इश्क़ का तूफ़ान
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इश्क़ का तूफ़ान

शोख़ चंचल ज़िन्दगी की हर निशानी ले गया,
कौन था वो जो मेरी सुबहें सुहानी ले गया।
उसके जाते ही मेरी बेनूर आँखें हो गईं ,
मेरी आंखों से छलकता पानी - पानी ले गया
ज़िन्दगी धुंधला गयी हर वर्क कोरा रह गया,
जीस्त के पन्नों पे लिखी हर कहानी ले गया।
इक मुसलसल शाम ही अब मेरे अफ़साने में है,
इश्क का तूफ़ान दरिया की रवानी ले गया।
अब कहीं अनवार तेरा कुछ पता मिलता नही,
हर गली रस्ते से कोई सब निशानी ले गया।
शनिवार, 6 दिसंबर 2008
इंसान का चेहरा!

उसे कोई भी शै हंसती हुई अच्छी नही लगती,
वो फूलों के लबों से मुस्कुराना छीन लेता है।
घने जंगल इसी की ज़द में आ कर शहर बनते हैं,
ये इन्सां तो परिंदों का ठिकाना छीन लेता है।
वो फूलों के लबों से मुस्कुराना छीन लेता है।
घने जंगल इसी की ज़द में आ कर शहर बनते हैं,
ये इन्सां तो परिंदों का ठिकाना छीन लेता है।
बुधवार, 5 नवंबर 2008
नया कारोबार
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दिल में मज़ार

इश्क की यादगार है भाई,
दिल मेरा दाग़दार है भाई,
उसने रिश्ते पे डाल दी मिट्टी,
मेरे दिल में मज़ार है भाई।
पूरी क़ीमत लगाइए अपनी,
अब यही कारोबार है भाई।
मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008
मेरे आंसू
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तन्हाई की आदत
हमें तन्हाइयों की आदत है,
हमको महफिल में मत बुला लेना।
याद आ जाएं जब मेरे आंसू ,
देखो पल भर को मुस्कुरा देना।
हमको महफिल में मत बुला लेना।
याद आ जाएं जब मेरे आंसू ,
देखो पल भर को मुस्कुरा देना।
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