सोमवार, 2 अगस्त 2010

ये कैसा सहारा!


मैं परेशां तो नहीं,
पूछा है तड़पाने के बाद
वो सहारा दे रहे हैं मुझको,
मर जाने के बाद

3 टिप्‍पणियां:

महफूज़ अली ने कहा…

अनवर भाई....... .कैसे हैं? बहुत ख़ूबसूरत लिखा है आपने....

सुशीला पुरी ने कहा…

न जाने
कितने रिश्ते
हररोज़ .....
सफ़ेद लिबासों में
दर्द की चादर ओढ़े
पढ़ते हैं .......
अपने-अपने नाम का
मर्सिया ......!!

amrendra "aks" ने कहा…

Bahut Umda Sir..............

Related Posts with Thumbnails