बुधवार, 13 जनवरी 2010

यादों की अलमारी



मैंने कभी सजा कर समेट कर नहीं रखा

यादों को तहा कर लपेट कर नहीं रखा।

इन्हे बेतरतीब अलमारी में भरता चला गया

मेरी ज़िन्दगी का कमरा बिखरता चला गया।

ज़हन का पट खुलते ही बेतहाशा बिखर गयी यादें

मुझे मुंह चिढा रहे हैं टूटे वादे और भूली बिसरी बातें।

अपने आप में गुंथ कर उलझ गयी है एक एक याद

छोर नहीं मिल रहा इसलिए सुलझ नहीं रही कोइ बात।

इधर कोइ नहीं आता किस से करुँ फ़रियाद

बंद कमरे में घुट जायेगी फिर मेरी आवाज़।

बिखरी हुई कुछ यादें अभी भी सो रही हैं,

उनीदी पलकों पर कुछ ख़्वाब संजो रही हैं

हाथ लगाने पर ये चिल्लाएंगी चीख़ उठेगीं

अभी तो बस धीरे धीरे ही रो रहीं हैं

मन बहलाने को ये यादें कोई कहानी माँगेगी

टूटे जुडते रिश्तों की फिर कोई निशानी मांगेंगी

जाने कितनी सदियों से ये प्यासी हैं

मुझे पता है ये मेरी आखों से पानी मांगेंगी।

9 टिप्‍पणियां:

aania sweet ने कहा…

Tooooooo....Gooddddd....! Justt toooo good........!
ek bhi line aisi nahi hai ki alag se mention ki jaaye....-poori ki poori dil mein utar jaane waali baat hai.....!

sach hai-Yaadein...., ya to hothon se muskaan maangti hain....ya phir...aankhon se paani.....!

मधुकर राजपूत ने कहा…

ज़िंदगी की हक़ीकत को छीलकर रख दिया, बहुत करीने से सजाया है। बहुत उम्दा और मैं निःशब्द।

Meenu Khare ने कहा…

जाने कितनी सदियों से ये प्यासी हैं

मुझे पता है ये मेरी आखों से पानी मांगेंगी।

बहुत गहरी अभिव्यक्ति. अच्छा लगा पढ कर.

amrendra "aks" ने कहा…

हाथ लगाने पर ये चिल्लाएंगी चीख़ उठेगीं

अभी तो बस धीरे धीरे ही रो रहीं हैं ।

kya khoob ukera hai man ke bhavo ko ...........lajwab .............

komal ने कहा…

KAMAAL KI SHAYRI KARTE HAIN AAP... MAIN TO SADIYON SE AAP KI DIWAANI RAHI HOON....
JO TUJHE DEKH CHUKA HO WO AUR KYA DEKHE...
KOMAL
NEW DELHI

सुशीला पुरी ने कहा…

बेहद खूबसूरत भाव ........

अनवारुल हसन [VOICE PRODUCTION] ने कहा…

...आप सब का आभारी हूँ ...

mukesh ने कहा…

maine kabhi sajakar sametkar nahi rakha
yaadon ko kabhi lapetkar nahi rakha

bhaijaaan bilkul galat agar aisa hota to sab ko bhula chuke hote per dil behlaane ke liye acchha likha yeh line aap per nahi jamti, agar jamti hoti to JALIM itni jalimana harqat na karta .aapke liye kucchh makool alfaaz neeche hai,
kucchh aapke kucchh andaz ke diwane hai,
kucchh surat ke to kucchh awaz ke diwane hai

thanks

nadan

स्वाति ने कहा…

मैंने कभी सजा कर समेट कर नहीं रखा

यादों को तहा कर लपेट कर नहीं रखा....


बहुत गहरी अभिव्यक्ति.

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