
अब तो ये भी याद नहीं है कितनी बार ये आँखें रोई,
इन बीते सालों में हमने ख़ुद ही अपनी लाशें ढोई.
... लेकिन उम्मीद कभी नहीं मरती...
अगर हम ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारी निभाएंगे
...तो हालात बदल जाएंगे...
...HAPPY REPUBLIC DAY
मैंने कभी सजा कर समेट कर नहीं रखा
यादों को तहा कर लपेट कर नहीं रखा।
इन्हे बेतरतीब अलमारी में भरता चला गया
मेरी ज़िन्दगी का कमरा बिखरता चला गया।
ज़हन का पट खुलते ही बेतहाशा बिखर गयी यादें
मुझे मुंह चिढा रहे हैं टूटे वादे और भूली बिसरी बातें।
अपने आप में गुंथ कर उलझ गयी है एक एक याद
छोर नहीं मिल रहा इसलिए सुलझ नहीं रही कोइ बात।
इधर कोइ नहीं आता किस से करुँ फ़रियाद
बंद कमरे में घुट जायेगी फिर मेरी आवाज़।
बिखरी हुई कुछ यादें अभी भी सो रही हैं,
उनीदी पलकों पर कुछ ख़्वाब संजो रही हैं ।
हाथ लगाने पर ये चिल्लाएंगी चीख़ उठेगीं
अभी तो बस धीरे धीरे ही रो रहीं हैं ।
मन बहलाने को ये यादें कोई कहानी माँगेगी
टूटे जुडते रिश्तों की फिर कोई निशानी मांगेंगी
जाने कितनी सदियों से ये प्यासी हैं
मुझे पता है ये मेरी आखों से पानी मांगेंगी।
§ 100.7 ऍफ़ एम् रेनबो लखनऊ में रेडियो
जॉकी और प्रसार भारती द्वारा अधिकृत
विज्ञापन एजेन्सी ‘वॉइस प्रोडक्शन’ का
संचालन.
ऑल§ इन्डिया रेडियो में लगभग दो
दशक काम का अनुभव.
इंटरनेशनल अवार्ड–2006
(§AIBD– एशियापैसिफिक इंस्टिट्यूट
फॉर ब्रोडकास्ट डेवलोप्मेंट) का
प्रथम पुरस्कार –इन्नोवेटिव मुज़िकल
रेडियो कार्टून डॉक्युमेंटरी “शाबाश बंटी”
(Well Done Banty).
इसी डॉक्युमेंटरी के लिए प्रोग्राम एंड
§ टेक्नीकलएक्सीलेंस आकाशवाणी
वार्षिक पुरस्कार–2005
(इन्नोवेटिव कैटगरी) –
प्रथम पुरस्कार – (लेखन हेतु).
एच आई वी+ व्यक्तियों पर आधारित
§ अन्य रूपक“अभिप्रयास”
(Persistent Effort ) को
आकाशवाणी वार्षिक पुरस्कार–
2005 (मेरिट पुरस्कार).
आकाशवाणी लखनऊ और
रेडियो जर्मनी के संयुक्त प्रोजेक्ट
में कार्य का अवसर, जिसके लिए
डायचे वेल्ले (रेडियो जर्मनी)
द्वारा सराहना एवं प्रशस्ति पत्र.
(§Based on Gender Equality
and Human Rights - October 2006).
प्रसिद्द कथक डांसर डॉक्टर
§ प्रसार भारती द्वारा अप्रूव ड्रामा आर्टिस्ट.§
प्रतिष्ठित समाचार पत्र- पत्रिकाओं
में नियमित लेखन.
§ उ0 प्र0 संगीत नाट्क अकाद्मी
में रेडिओ जोकी कोर्स का अध्यापन्।