बुधवार, 14 मई 2008

तन्हा चाँद

मैं अकेला हूँ चाँद भी तन्हा,

ज़िन्दगी की उदास राहों में।

सोचता हूँ लिपट के सो जाऊं,

चाँद की इन हसीन बाहों में।

3 टिप्‍पणियां:

komal ने कहा…

Wah kya baat hai, ab samajh mein aaya anwar ji ki aap ko shayri ki ye virasat kahan se mili.

Sandhya

ओम ने कहा…

बहुत खूब !!!
सागर हमीरपुरी साहब के और कलाम लगाईये ...

mushtaque hashimi ने कहा…

it is very emotional to read such lines to whome you are linked emotionally .it seems that somebody is reading these lines at home .

Related Posts with Thumbnails