शनिवार, 12 मार्च 2011

तुम्हारा ख़त


तुम्हारा ख़त जो आज आया था,
उसने
दिल को मेरे तड़पाया था।
याद
फिर मुझको तेरी आई थी,
दर्द
मीठा सा उभर आया था।

सोमवार, 3 जनवरी 2011

नव वर्ष मंगलमय


यादों की रहगुज़र से ...

आप के दिल की डगर तक …

बिखरे पड़े हैं ख़्वाब

इन्हें प्यार से सहेज लीजिये आप.

पूरी हो इन ख़्वाबों की ताबीर,

निखर उठे ज़िन्दगी की तस्वीर॥

नव वर्ष मंगलमय

मंगलवार, 30 नवंबर 2010

प्यारी सी एक घरवाली


त्योहारों का मज़ा मिले जो साथ हो कोई दिलवाली,
उसके संग तो हो जाएगी हर दिन अपनी दीवाली.
तान के सीना साथ में उसके हम भी जाएँगे बाज़ार,
जल्दी से 'अनवार' दिला दो प्यारी सी एक घरवाली.

मंगलवार, 7 सितंबर 2010

ईद मुबारक !



ख़ुदाया बना कोई ऐसा निज़ाम,
जहाँ सबकी ख़ुशियों का हो इंतज़ाम।
रहे गर न बाक़ी कोई बदनसीब,
तो हो जाए 'अनवार' अपनी भी ईद.

सोमवार, 2 अगस्त 2010

ये कैसा सहारा!


मैं परेशां तो नहीं,
पूछा है तड़पाने के बाद।
वो सहारा दे रहे हैं मुझको,
मर जाने के बाद।

मंगलवार, 29 जून 2010

माफ़ कीजियेगा... मगर!


कभी कभी लगता है...
ये
हमको पीछे छोड़ कर,
बहुत
आगे निकल जाएँगे।

फिर
एहसास होता है,
कि
शायद...
ज़िन्दगी
के अगले चौराहे पर ही,
हमें
इनकी लाश मिले।

क्योंकि
...
लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से,
ये
तो यहीं मर जाएंगे।

सोमवार, 7 जून 2010

तुम मुझ को आवाज़ न दो



दिल की तड़प संगीत है ख़ुद ही,
तुम
अब कोई साज़ न दो।
सिसक
रहा हूँ आज अकेला,
तुम
मुझ को आवाज़ न दो।

दिल
की हर एक धड़कन,
मुझको
सारी रात जगाती है।
तन्हा
मैं जब भी होता हूँ,
तेरी
याद सताती है।

धड़
कन तो एक गीत है ख़ुद ही,
तुम
अब कोई राग न दो।
सिसक
रहा हूँ आज अकेला,
तुम
मुझ को आवाज़ न दो।

जाने
क्यों तनहाई में,
मैं नीर
बहाने लगता हूँ।
दर्दे
-जिगर जब बढ़ जाता है,
मैं मुस्काने लगता हूँ।

काट
दिए हैं पंख समय ने,
अब
इनको परवाज़ न दो।
सिसक
रहा हूँ आज अकेला,
तुम
मुझ को आवाज़ न दो।


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