शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

नागार्जुन जी की कविता

कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास।
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उन के पास॥  
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियो की गश्त ।
कई दिनों तक चूहे की भी हालत रही शिकस्त॥
दाने आये घर के अन्दर कई दिनों के बाद।
धुआं उठा आंगन के ऊपर कई दिनों के बाद। 
चमक उठीं घर भर की आंखें कई दिनों के बाद।
कौए ने खुजलाई पाखें कई दिनों के बाद।


शनिवार, 31 दिसंबर 2011

नव वर्ष २०१२ मंगलमय

शनिवार, 11 जून 2011

दामन में वो ही दाग़ लगाएगा


शीशा है दिल तो टूट ही जायेगा एक दिन,
अपनी कहानी ख़ुद ही सुनाएगा एक दिन।
आंधी ये मुझे रोक ले उठता नहीं सवाल,
तूफां का इंतज़ार है आएगा एक दिन।
अब ऐतबार हमको नही दुश्मनों पे है,
दुश्मन भी दोस्त बन के सताएगा एक दिन।
किस से है मोहब्बत हमें हम कैसे बता दें,
दिल ख़ुद हमारा तुम को बताएगा एक दिन।
नादां समझ के हमने उसे माफ़ कर दिया,
लेकिन वो कह गया है बताएगा एक दिन,
बादल गरजने वाले भी बरसात करेंगे,
क्या ज़िन्दगी में ऐसा भी आएगा एक दिन।
ये बात मान लो के भलाई इसी में है,
कश्ती को नाख़ुदा ही डूबाएगा एक दिन।
देता हूँ तुमको आज मैं ईमान की दावत,
बिगड़ी तो बस खुदा ही
बनाएगा एक दिन।
अपना समझ रहे हैं जिसे आज वो 'अनवार'
दामन में वो ही दाग़ लगाएगा एक दिन।

शनिवार, 12 मार्च 2011

तुम्हारा ख़त


तुम्हारा ख़त जो आज आया था,
उसने
दिल को मेरे तड़पाया था।
याद
फिर मुझको तेरी आई थी,
दर्द
मीठा सा उभर आया था।

सोमवार, 3 जनवरी 2011

नव वर्ष मंगलमय


यादों की रहगुज़र से ...

आप के दिल की डगर तक …

बिखरे पड़े हैं ख़्वाब

इन्हें प्यार से सहेज लीजिये आप.

पूरी हो इन ख़्वाबों की ताबीर,

निखर उठे ज़िन्दगी की तस्वीर॥

नव वर्ष मंगलमय

मंगलवार, 30 नवंबर 2010

प्यारी सी एक घरवाली


त्योहारों का मज़ा मिले जो साथ हो कोई दिलवाली,
उसके संग तो हो जाएगी हर दिन अपनी दीवाली.
तान के सीना साथ में उसके हम भी जाएँगे बाज़ार,
जल्दी से 'अनवार' दिला दो प्यारी सी एक घरवाली.

मंगलवार, 7 सितंबर 2010

ईद मुबारक !



ख़ुदाया बना कोई ऐसा निज़ाम,
जहाँ सबकी ख़ुशियों का हो इंतज़ाम।
रहे गर न बाक़ी कोई बदनसीब,
तो हो जाए 'अनवार' अपनी भी ईद.
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