सोमवार, 5 नवंबर 2018
कभी ‘हिट पे हिट एफ़ एम इशटाइल’ प्रोग्राम के ज़रिए लम्बे समय तक डॉक्टर अन्नू भाई (यानी मैं) और बिल्लो चच्ची (अक़लमंद बूढ़ी औरत का किरदार) ने रेडियो जगत में धूम मचाई थी। वही बिल्लो चच्ची यानी जेटी यानी जया तिवारी से कल हुई एक सु:खद मुलाक़ात। ...उस समय हमेशा मुझसे लोग यही पूछते थे की आप के साथ रेडियो पर वो बूढ़ी औरत कौन है ! ... जया अब भी बिलकुल वैसी ही हैं और मैं भी आप के दिल का डॉक्टर अन्नू भाई पी पी एम एफ़ (प्राइमरी पास मिडिल फ़ेल) ...ये स्टैंडअप कॉमेडी शो था और जेटी से पहले बड़कऊ जी (पवन पाण्डेय-वरिष्ठ रंगकर्मी) हमारे साथ हुआ करते थे और लाइव प्रोग्राम में उन्होंने मेरा नाम अन्नू रख दिया था, वैसे अन्नू वास्तव में मेरे बड़े भाई का नाम है। ये भी बता दूँ कि प्रोग्राम में कल्लो और पारो नाम की दो नर्सों से भी मैं बात किया करता था जो वास्तविक रूप से कहीं नहीं थीं।
गुरुवार, 5 मार्च 2015
बुधवार, 31 दिसंबर 2014
मंगलवार, 19 अगस्त 2014
रविवार, 23 फ़रवरी 2014
शनिवार, 22 फ़रवरी 2014
नागार्जुन जी की कविता
कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास।
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उन के पास॥
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियो की गश्त
।
कई दिनों तक चूहे की भी हालत रही शिकस्त॥
दाने आये घर के अन्दर कई दिनों के बाद।
धुआं उठा आंगन के ऊपर कई दिनों के बाद।
चमक उठीं घर भर की आंखें कई दिनों के बाद।
कौए ने खुजलाई पाखें कई दिनों के बाद।
शनिवार, 31 दिसंबर 2011
शनिवार, 11 जून 2011
दामन में वो ही दाग़ लगाएगा

शीशा है दिल तो टूट ही जायेगा एक दिन,
अपनी कहानी ख़ुद ही सुनाएगा एक दिन।
आंधी ये मुझे रोक ले उठता नहीं सवाल,
तूफां का इंतज़ार है आएगा एक दिन।
अब ऐतबार हमको नही दुश्मनों पे है,
दुश्मन भी दोस्त बन के सताएगा एक दिन।
किस से है मोहब्बत हमें हम कैसे बता दें,
दिल ख़ुद हमारा तुम को बताएगा एक दिन।
नादां समझ के हमने उसे माफ़ कर दिया,
लेकिन वो कह गया है बताएगा एक दिन,
बादल गरजने वाले भी बरसात करेंगे,
क्या ज़िन्दगी में ऐसा भी आएगा एक दिन।
ये बात मान लो के भलाई इसी में है,
कश्ती को नाख़ुदा ही डूबाएगा एक दिन।
देता हूँ तुमको आज मैं ईमान की दावत,
बिगड़ी तो बस खुदा ही बनाएगा एक दिन।
अपना समझ रहे हैं जिसे आज वो 'अनवार'
दामन में वो ही दाग़ लगाएगा एक दिन।
शनिवार, 12 मार्च 2011
तुम्हारा ख़त

तुम्हारा ख़त जो आज आया था,
उसने दिल को मेरे तड़पाया था।
याद फिर मुझको तेरी आई थी,
दर्द मीठा सा उभर आया था।
सोमवार, 3 जनवरी 2011
नव वर्ष मंगलमय
लेबल:
2011,
नव वर्ष मंगलमय

यादों की रहगुज़र से ...
आप के दिल की डगर तक …
बिखरे पड़े हैं ख़्वाब
इन्हें प्यार से सहेज लीजिये आप.
पूरी हो इन ख़्वाबों की ताबीर,
निखर उठे ज़िन्दगी की तस्वीर॥
नव वर्ष मंगलमय
मंगलवार, 30 नवंबर 2010
प्यारी सी एक घरवाली

त्योहारों का मज़ा मिले जो साथ हो कोई दिलवाली,
उसके संग तो हो जाएगी हर दिन अपनी दीवाली.
तान के सीना साथ में उसके हम भी जाएँगे बाज़ार,
जल्दी से 'अनवार' दिला दो प्यारी सी एक घरवाली.
मंगलवार, 7 सितंबर 2010
ईद मुबारक !

ख़ुदाया बना कोई ऐसा निज़ाम,
जहाँ सबकी ख़ुशियों का हो इंतज़ाम।
रहे गर न बाक़ी कोई बदनसीब,
तो हो जाए 'अनवार' अपनी भी ईद.
सोमवार, 2 अगस्त 2010
मंगलवार, 29 जून 2010
माफ़ कीजियेगा... मगर!

कभी कभी लगता है...
ये हमको पीछे छोड़ कर,
बहुत आगे निकल जाएँगे।
फिर एहसास होता है,
कि शायद...
ज़िन्दगी के अगले चौराहे पर ही,
हमें इनकी लाश मिले।
क्योंकि...
लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से,
ये तो यहीं मर जाएंगे।
सोमवार, 7 जून 2010
तुम मुझ को आवाज़ न दो

दिल की तड़प संगीत है ख़ुद ही,
तुम अब कोई साज़ न दो।
सिसक रहा हूँ आज अकेला,
तुम मुझ को आवाज़ न दो।
दिल की हर एक धड़कन,
मुझको सारी रात जगाती है।
तन्हा मैं जब भी होता हूँ,
तेरी याद सताती है।
धड़कन तो एक गीत है ख़ुद ही,
तुम अब कोई राग न दो।
सिसक रहा हूँ आज अकेला,
तुम मुझ को आवाज़ न दो।
जाने क्यों तनहाई में,
मैं नीर बहाने लगता हूँ।
दर्दे-जिगर जब बढ़ जाता है,
मैं मुस्काने लगता हूँ।
काट दिए हैं पंख समय ने,
अब इनको परवाज़ न दो।
सिसक रहा हूँ आज अकेला,
तुम मुझ को आवाज़ न दो।
गुरुवार, 6 मई 2010
तनहाई की बाहें

कैसे कह दूं के मुझे महफ़िलों का शौक़ नहीं,
और महफ़िल में भी जाने से मुझे रोक नहीं,
फिर न जाने क्यों मेरा दिल ये सिहर जाता है?
वक़्त तन्हाई की बाँहों में गुज़र जाता है ???
मंगलवार, 30 मार्च 2010
क़लम तलवार के आगे

मैं काग़ज़ के सिपाही काट कर लश्कर बनाता हूँ,
नहीं है काम ये आसां मगर अक्सर बनाता हूँ।
मेरी हालत तो देखे पास आकर उस घड़ी कोई,
मैं अरमानो में अपने आग जब हंस कर लगाता हूँ।
ये जितने फूल हैं ले लो हमें तुम ख़ार रहने दो,
ये दामन थाम लेंगे मैं इन्हें रहबर बनाता हूँ।
नज़र आती है मुझको हर हसीं चेहरे की सच्चाई,
मैं दरपन को उठा कर जब कभी पैकर बनाता हूँ।
जगा कर दर्द हर दिल में बुझा दो आग नफ़रत की,
मैं अपने अश्क़ से पैमाना- ए- कौसर बनाता हूँ।
जहाँ से दूर कोसों हो गया हो दर्द और आहें,
मैं ऐसे महल तख्तों-ताज को ठोकर लगाता हूँ।
उठाई है क़लम हमने यहाँ तलवार के आगे,
मैं दुनिया को क़लम का आज ये जौहर दिखाता हूँ।
मेरे गिरने पे क्यों 'अनवार' हंस पड़ती है ये दुनिया,
मैं ठोकर खा के अपनी ज़िन्दगी बेहतर बनाता हूँ।
सोमवार, 1 मार्च 2010
रंगों का मज़हब
लेबल:
मज़हब,
शुभ होली,
होली मुबारक

सभी रंगों ने आपस में मिल कर,
मिटा दिया है अपना अस्तित्व।
भुला दिया है अपना धर्म,
नही रहा भेद भाव का तत्त्व।
नहीं रह गयी इनकी पहचान,
इनसे कुछ सीखेगा इन्सान ?
शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010
एक बात कहना चाहते हैं

आप के पास वाली कुर्सी पर
अब कोई और बैठता है
आप के क़रीब है
ये सोच कर ऐंठता है।
मेरी हर चीज़ पर
कर लिया है अधिकार,
मुझे बना दिया है लाचार।
ऑफिस से लेकर घर तक
आपके सारे काम निपटाता है।
वो इसी पर खुश है
के आप के घर जाता है।
लोग छुप छुप कर बतिया रहे है
आप पर उँगलियाँ उठा रहे हैं
बदनामी आप की होगी
उसका क्या जाता है।
कभी मैंने भी आपका हाथ बटाया था,
घर नहीं पर ऑफिस का काम निपटाया था।
एक फ़ैसले ने मुझे आप से दूर कर दिया,
मेरे ट्रांसफ़र ने मुझे मजबूर कर दिया।
हम आप से एक बात कहना चाहते हैं,
हम आप के पास रहना चाहते हैं।
सोमवार, 25 जनवरी 2010
गणतंत्र का दीया

अब तो ये भी याद नहीं है कितनी बार ये आँखें रोई,
इन बीते सालों में हमने ख़ुद ही अपनी लाशें ढोई.
... लेकिन उम्मीद कभी नहीं मरती...
अगर हम ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारी निभाएंगे
...तो हालात बदल जाएंगे...
...HAPPY REPUBLIC DAY
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